HINDI NEWS SIRSA: अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में छाए गुरुकुल के छात्र

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Wednesday, December 19, 2018

अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में छाए गुरुकुल के छात्र

कुरुक्षेत्र (देवीलाल)। गीता जयंती महोत्सव 2018 के अवसर पर जयराम विद्यापीठ परिसर में चल रही अंतर्विद्यालय सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करते हुए कोरियाग्राफी में विशेष प्रस्तुति सम्मान प्राप्त किया। बच्चों की उपलब्धि पर गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सिंह सैनी ने निदेशक व प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, संस्कृत अध्यापक दयाशंकर शास्त्री, संगीत विभाग अध्यक्ष कमलेश पंत, कोरियोग्राफी निर्देशक दिनेश चौहान, कला अध्यापक ईश्वर सहित सभी विजेता छात्रों को शुभकामनाएं दीं, वहीं गुरुकुल के संरक्षक एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी दूरभाष पर पूरे गुरुकुल परिवार को बधाई प्रेषित की है। 


गुरुकुल के प्रधान कुलवन्त सैनी ने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में कुरुक्षेत्र जिला के लगभग 30 विद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया जिसमें पेंटिंग प्रतियोगिता में गुरुकुल के छात्र दिव्यांश आर्य ने प्रथम, संस्कृत श्लोकोच्चारण में ऋषि बंसल ने द्वितीय तथा एकल गायन में तुषार गोयल ने तृतीय स्थान प्राप्त कर गुरुकुल व
अपने माता-पिता का नाम रोशन किया। इसके अतिरिक्त गुरुकुल के छात्रों ने नारी का सम्मान नामक कोरियोग्राफी प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी और इसके लिए श्री जयराम गीता जयन्ती समारोह समिति ने गुुरुकुल की कोरियोग्राफी की टीम व निर्देशक दिनेश चौहान को विशेष प्रस्तुति सम्मान देकर पुरस्कृत किया। कोरियोग्राफी में गुरुकुल के विवेक, आदित्य, प्रणव, शम्मी, दीक्षान्त, विमल, विक्रान्त तथा आयुष ने भाग लिया।

गुरुकुल के निदेशक व प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता ने कहा कि गुरुकुल में बच्चे के चहुमुखी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है जिससे बच्चे के अन्दर छिपी हुई प्रतिभा को निखारा जा सके। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में कुछ न कुछ विशेष काबलियत होती है, बस जरूरत है उस काबलियत को पहचानने और संवारने की। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के छात्रों की यही खूबी उन्हें दूसरे बच्चों से अलग बनाती है, साथ ही गुरुकुल की प्रबंधक समिति के कुशल मार्गदर्शन और गुरुकुल के अध्यापकों के कठिन परिश्रम के चलते गुरुकुल के बच्चे जहाँ भी जाते हैं, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं। गुरुकुल के सह प्राचार्य शमशेर सिंह ने भी सभी छात्रों को लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कड़े परिश्रम का मूलमंत्र दिया।

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